RITURAJ SHARMA

RITURAJ SHARMA

hamesha khud se sawal karo. life me hamesha kuch naya karne per focus karo. khud ki life ko badlne ke liye pahle khud ko badlna or smajhna bahut jaruri hai.achcha or bura kuch nhai hota jaisa ham sochte hai vese ban jaate hai.diffrent think others.thats your right way.

लोग आते हैं,फिर चले जाते हैं।

लोग आते हैं,फिर चले जाते हैं। धीरे-धीरेवक़्त मोह, प्रेम, मृत्युसभी को पीछे ले जाता है। हमसे कहते हैं—“ज़िंदगी छोटी है, खुश रहो।”पर हम अपने उसूलकहां छोड़ पाते हैं? हम उन्हीं उसूलों मेंइतना डूब जाते हैंकि खुशियों का रास्तायाद ही नहीं…

पहाड़ और नदी

पहाड़ खड़ा था सदियों से,थोड़ा शांत… थोड़ा गंभीर।चोटियों पर बर्फ़ थी,पर दिल में एक इंतज़ार धीर-धीरे जलता था। नदी दूर कहीं से बहकर आती,हवाओं में हँसी बिखेरती,पत्थरों से खेलती,और पहाड़ के पैरों में हरियाली उगा जाती। वो आती तो पहाड़…

त्याग का अंत

SOFT LOVE STORY. THOUGHTS SOCITY

उसने त्याग किया…घर और परिवार की खुशियों के लिए।पर कौन जानता था—वो त्याग, त्याग नहीं,उसकी अपनी खुशियों की मृत्यु थी। उसके बलिदान का कहीं शोर नहीं,किसी दीवार ने उसकी चुप्पी नहीं सुनी,क्योंकि सब व्यस्त थे—अपने-अपने उत्सवों में। किसी को खुशी…

“समय और मैं”

“समय हर समय एक-सा नहीं रहता,किसी के लिए नहीं… मेरे लिए भी नहीं।कभी था मैं वैसा, जैसा सबको भाता,अब बदल गया हूँ — शायद ज़रूरत थी यही। बदला हुआ इंसान ख़त्म नहीं होता,वो बस एक नया रूप लेकर जीता है,बीते…

इंतज़ार

“इंतज़ार चाहे राधा ने किया,या सती ने किया, या फिर सीता ने —पर प्रेम सबने किया,बस इस सोच के साथ किचाहे पूरा जीवन बीत जाए,पर रहना है तो बसकिसी एक के होकर रहना है…”

“प्रेम का बीज”

“प्रेम का बीज” अगर एक बीज सही जगह गिर जाए,तो वह स्वयं ही अंकुरित हो जाता है।धीरे-धीरे वह एक वृक्ष बनता है —प्रकृति उसे अपने आँचल में पालती है।फिर वह यह नहीं देखती किवह बाग़ में है, जंगल में है,…

“The Artist of Today”

Every person today is an artist,Who looked at the lines on their palmsAnd stopped before taking the first step. Who measured the height of the skyAnd gave up before learning to fly. Who saw the distance to the destinationAnd turned…

घमंड और संस्कार

अकड़ और संस्कार एक दुकानदार था जिसे अपने व्यापार पर बहुत घमंड था।दुकान पर जो भी ग्राहक आता, वह उनसे अकड़ भरे लहज़े में ही बात करता। एक दिन एक बुज़ुर्ग उसकी दुकान पर आए। दुकानदार ने उनसे भी उसी…

जिसकी कमी हम महसुस करते हैं।

भगवान से हम वही माँगते हैं।जिसकी कमी हम महसुस करते हैं। लेकिन जो मिला,उसका हम उन्हें कभी धन्यवाद नहीं देते।हम बस कहते तो है,की जो हो रहा है। ऊपर वाले जी मर्जी से हो रहा है।लेकिन हम उसकी मर्जी पर…

वृक्ष को वृक्ष बनने में कई साल लग जाते है।

जिस तरह एक वृक्ष को वृक्ष बनने में कई साल लग जाते है।उसी तरह एक पिता को पिता बनने में भी कई साल लग जाते है।जिस तरह एक वृक्ष को वृक्ष बनने के लिए प्रकृति के आंधी तूफानों से लड़ना…

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