समय और धैर्य
एक बार एक साधु नदी के किनारे तपस्या कर रहा होता है। और जोर जोर से चिल्ला रहा होता है। जो चाहोगे वो पाओगे। जो चाहोगे वो पाओगे। जो भी गाँव वाला वहां से निकलता उसे पागल समझ कर आगे…
एक बार एक साधु नदी के किनारे तपस्या कर रहा होता है। और जोर जोर से चिल्ला रहा होता है। जो चाहोगे वो पाओगे। जो चाहोगे वो पाओगे। जो भी गाँव वाला वहां से निकलता उसे पागल समझ कर आगे…

जब भी जीवन में बड़े डिसीजन लेने होते है तो सब बोलते है जो भी डिसीजन लो सोच समझकर लो । मगर फिर जब हम डिसीजन लेते है तो वही लोग हमे मजबूर बना देते है। लाइफ में दो बार…
जिस की जो ही जानता है।