जिस तरह एक वृक्ष को वृक्ष बनने में कई साल लग जाते है।
उसी तरह एक पिता को पिता बनने में भी कई साल लग जाते है।
जिस तरह एक वृक्ष को वृक्ष बनने के लिए प्रकृति के आंधी तूफानों से लड़ना पड़ता है
उसी तरह एक पिता को पिता बनने के लिए इस समाज की सोच और मानसिकता से लड़ना पड़ता है।
जिस तरह एक वृक्ष एक वृक्ष होने पर हमेशा अपने फलों का त्याग करता हैं।
उसी तरह एक पिता पिता होने पर अपना हृदय विशाल रख कर अपनी खुशियां,
अपने परिवार की खुशियों के लिए त्याग देता है।