मैं दूर हूं तुमसे

मैं दूर हूं तुमसे तो यह मत समझना कि मैं प्यार नहीं करती..
तरसती हूं तुम्हें देखने के लिए यह मत समझना कि तेरा इंतजार नहीं करती..
बहुत प्यार है तुमसे यह मत समझना तुम्हें याद नहीं करती..

अंधा भरोसा है मुझे तुम पर तुम्हारे अलावा किसी पर ऐतबार नहीं..
यूं तो बहुत लोग हैं दुनिया में पर मैं तुम्हारे अलावा किसी पर नहीं मरती..

कविता शर्मा

2 Comments

Leave a Reply to VijayCancel Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)