ज़िंदगी के बाज़ार में हर कोई कुछ न कुछ कमा रहा होता है…
लेकिन कुछ लोग सिर्फ पैसे ही नहीं, घमंड भी इकट्ठा करते हैं…
कभी-कभी ज़िंदगी एक सवाल पूछकर चली जाती है…
और कुछ लोग जवाब में अपनी असली सोच दिखा देते हैं…
लेकिन समय… हर घमंड का हिसाब रखता है…
एक दिन सब यहीं छूट जाता है…
और जो विरासत समझी गई थी…
वो बोझ बन जाती है…
असली विरासत दौलत नहीं…
संस्कार और मेहनत होती है।