अक्सर जब लोगों से पूछो — “क्या हाल है?”
तो जवाब आता है — “सब ठीक है…”
पर मैं सोचता हूँ,
इस “सब ठीक है” के पीछे
कितने दर्द चुप बैठे होंगे,
कितनी रातें बिना नींद के कटी होंगी।
कितनी बार खुद को समझाया होगा,
आँखों को हँसना सिखाया होगा,
दिल टूटकर भी चुप रहा होगा,
तब जाकर ये शब्द निकल पाया होगा —
“हाँ… सब ठीक है।”