मौन ध्वनि की अनुपस्थिति नहीं है-
यह अनकही हर चीज़ की उपस्थिति है।
यह शब्द से पहले की सांस है,
तूफ़ान से पहले की शांति,
तारों के जन्म के बीच का विराम।
मौन ब्रह्माण्ड की मूल भाषा है।
शब्द होने से पहले शांति थी।
आवाज़ होने से पहले सन्नाटा था.
और अभी भी – जीवन के शोर के नीचे,
विचार के नीचे,समय के नीचे-
सन्नाटा रहता है।